
A. Amaresh जी,
आपकीं बात भक्तों को हजम नहीं होगी।
मोदी के डेढ़-डेढ़ घण्टे के व्याख्यान में किसीने ऐसी कोई बात नहीं सुनी होगी जिससे कोई नई जानकारी मिलती हो या सुनकर ऐसा लगा हो कि एक पीएम का भाषण सुन रहे हैं। आई क्यू का तो ये हाल है कि बच्चे भी हंसते हैं।
कुछ भी ..हास्यास्पद और बेसिर पैर की बोल जाते हैं।
समय और स्थान का कोई सम्बन्ध ही नही होता। अब, ऐसे मूढ़ की वकालत में भक्त और मीडिया हज़ार -लाख फ़न लेकर खड़े हो जाएं तो मुल्क और लोकतंत्र का दुर्भाग्य नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?
दिल इतना संकीर्ण और ओछा कि पहलीं बार हिंदी के किसी भारतीय पत्रकार को मैग्सेसे मिलता है तो पीएम के मुंह से बधाई का एक शब्द नही निकलता! झूठ बोलने और झूठी तारीफ़ सुनने के8 ऐसी आदत पड़ गयी है कि सुधीर-अंजना-रजत जैसे भांडों के अलावा कोई दिखता ही नही।
क्या कहें…!!
– Shankar Pralami