
पैगाम : संघी बच्चों के नाम
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गुस्सा थूंको , और सुनो मेरी बात. आखिर JNU में हर बार लेफ्ट क्यों जीतते हैं ?
क्योंकि वहां दाखिला परीक्षा के आधार पर होता है , और सुपठित – सुचिंतित लड़के एडमिशन पा जाते हैं. वे लड़के सुपठित इसलिए होते हैं , क्योंकि उन्होंने वास्तविक इतिहास पढा होता है.
वे जानते हैं कि फ़िरोज़ गांधी मुस्लिम नहीं , अपितु पारसी था.
इसलिए भी कि वह गलत जवाब नहीं लिखते कि ताजमहल पहले तेजोमहालय नामक मन्दिर था.
समुद्र के बीच की चट्टानों को वे एक भौगोलिक गतिविधि मानते हैं , न कि #रामसेतु!
उन्हें विदित है कि बारिश इंद्र देव की कृपा से नहीं, अपितु समुद्र के पानी के वाष्पीकरण से होती है.
ऐ भतीजे !
इतिहास , भूगोल , खगोल , भौतिकी को मिथकों के नहीं, अपितु तर्क और तथ्य की कसौटी पर कसना सीख! खूब पढ़ , लिख और JNU में अपनी तादाद बढा , फिर वहां भगवा झंडा फहरा बिंदास !
देख कन्हैया कुमार को अंतरराष्ट्रीय राजनीति की कैसी सांगो पांग जानकारी है, और एक तू है , जो मक्का की मस्जिद को हनुमान मंदिर बताता फिरता है!
तू इतना बड़ा हो गया फिर भी बच्चों जितना IQ रखता?
सिर्फ तेरी नाक बहना बंद हुई , अन्यथा तेरा बौद्धिक स्तर अभी तक नर्सरी के बच्चे जितना है! क्योंकि धूर्त सत्ता पिपासु ने तेरी मत भरमा दी.
आखिर क्या तू अपढ़ – उजड्ड रह कर जे एन यू मे पढ़ेगा ?तू जिसको भगवान मानता है उसकी डीग्री का ही पता नहीं । काबिल बन मेरे प्यारे बच्चे ! और भविष्य की लहरों पर सवारी गांठ!
Drbn Singh