राकेश सिन्हा जैसे झुट्ठा लोग राज्य सभा में क्यों हैं?

यह आदमी ‘मिस इन्फॉर्मेशन’ की खान है.

राकेश सिन्हा ने अभी राज्य सभा में बहस के दौरान संविधान सभा के गठन के बारे में अजीब सी टिप्पणी की- ” कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इन्डिया ने सत्रह अलग-अलग संविधान सभाओं के गठन का प्रस्ताव रखा था. ये लोग विभाजनकारी थे, मीर जाफ़र और जयचंद जैसे.”

राज्य सभा सांसद राकेश सिन्हा दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर रहे हैं. उन्हें मालूम होना चाहिए, ‘ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया’ के संस्थापक सदस्य मानबेन्द्र नाथ रॉय M.N. Roy ने 1934 में एक संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव सबसे पहले दिया था. न कि सत्रह अलग-अलग.
उसी प्रस्ताव को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1935 में बिना किसी संशोधन के पार्टी की आधिकारिक मांग के रूप में रखा, जिसे 1940 में ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार किया था.

राकेश सिन्हा जैसे लोग न सिर्फ़ संसद को गुमराह कर रहे हैं, बल्कि आज़ादी के इतिहास को सिर के बल खड़ा करने का कुप्रयास कर रहे हैं.

Pushp Ranjan

Published by Cow

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