ब्राह्मण अपना चरित्र कैसे बदलता है? जानिए!!

ब्राह्मण जब विद्रोही दिखना चाहता है तो कम्युनिस्ट रुझान दिखाता है और क्रांति के गुण गाता है।

ब्राह्मण जब उत्पाती और बौचट होता है तो संघी हो जाता है और भाजपा की शरण में लोटता है।

ब्राह्मण जब मजबूर होता है तो सपाई और बसपाई हो जाता है और समाजवाद व बहुजन हिताय के गुण गाता है

और ब्राह्मण जब लिबरल व काइयां होता है तो कांग्रेसी हो जाता है और नेहरू नहीं ‘पंडित नेहरू ‘ के गुण गाता है।

आजकल ये दौर फिर से आता दिख रहा है।

खैर.. इन सबमें कॉमन क्या है ?नहीं पता.यही कि ब्राह्मण अपना ब्राह्मण होना किसी भी सूरत में नहीं छोड़ता।

– प्रद्युम्न यादव ,

वरिष्ठ ब्राह्मण चिंतक

Published by Cow

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