कुर्मियों की कमाई सामंतवादी सवर्णों ने खाई- लौटन राम निषाद!

कुर्मियों से हिंदुत्व की खेती करवायी गयी और अब सामंतवादी सवर्ण फसल काट रहे हैं।

कुछ कुर्मी सिर्फ इसलिए खुश हैं कि मोदी ने सरदार पटेल की विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा 3600 करोड़ में व शिवाजी की मुम्बई में 2500 करोड़ की मूर्ति लगवा दी।

आइये समझते हैं-

जब भाजपा का कोई राजनैतिक व सामाजिक आधार नहीं था, तब हिंदुत्व की अलख जगाने का ठेका कुर्मियों के पास था व सवर्ण और सामंतवादी ताकतें कांग्रेस के बड़े व छोटे नेताओं के रूप में राजनैतिक मलाई उड़ा रहीं थी।

1- केशुभाई पटेल गुजरात में भाजपा के प्रभावशाली नेता थे।कुर्मियों व अन्य पिछड़ों के व्यापक जन समर्थन से भाजपा की राजनीति को राज्य की बुलंदियों तक पहुँचाया।

बाद में संघियों के कुटिल दिमाग ने कट्टर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के द्वारा केशूभाई पटेल की राजनैतिक हत्या करवाई।

2- गुजराती कुर्मी प्रवीण तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद के फायर ब्रांड नेता थे। उनके बिना भाजपा को हिंदुओं का ब्यापक जन समर्थन असम्भव था। जब 2014 में पहली बार भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आयी, तब प्रवीण तोगड़िया को दूध की मक्खी की तरह निकाल कर बाहर फेंक दिया गया।

3- विनय कटियार यूपी में हिंदुत्व और भाजपा का फायरब्रांड चेहरा हुआ करते थे, राम मंदिर आंदोलन से लेकर भाजपा को पिछड़ों में ब्यापक जनाधार के कुशल कारीगर। आज विनय कटियार की यूपी भाजपा में बहुत दयनीय स्थिति है।

4- ओम प्रकाश सिंह भाजपा यूपी में कुर्मियों और पिछड़ों के कद्दावर नेता थे और भाजपा सरकार में उनका प्रभावशाली कद था, लेकिन फिर पिछड़ा होने के कारण ओम प्रकाश सिंह जी को बड़ी सफाई से किनारे लगा दिया गया।

5- संतोष गंगवार जी 8 बार के सांसद को आज तक भाजपा ने कभी भी भारत सरकार में कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय या कैबिनेट में दर्जा नहीं दिया, क्यों कि वह संघ की सामंतवादी मानसिकता के लिये उपयुक्त ब्यक्ति नहीं हैं।

6- हार्दिक पटेल, जिन कुर्मियों के दम पर भाजपा ने गुजरात मे कांग्रेस के किले को ढहा कर सत्ता पर कब्ज़ा जमाया, बाद में उन्ही को ठिकाने लगाया और यह सिलसिला वर्तमान तक जारी है।मोदी व शाह की जोड़ी ने हार्दिक को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिलवा दिया।

7- छत्तीसगढ़ से रमेश बैस जी, जो कुर्मी हैं और 7 बार से सांसद थे, 2019 के लोकसभा चुनाव में उनका भी टिकट काट दी गयी।

8- उन्नाव जिले में भाजपा के कद्दावर नेता,पूर्व विधायक एडवोकेट बाबू कृपाशंकर सिंह जी को भी भाजपा व सामंती जातिवादी हृदयनारायण दीक्षित ने बहुत सफाई से किनारे लगा दिया, क्योंकि उन्होंने भी सामंतवादी ताकतों के आगे कभी समर्पण नही किया,और पिछडो व दलितों की लड़ाई में सामंतवादी मानसिकता वाले गुंडों से हमेशा मोर्चा लेते रहे।

9.पंकज चौधरी 6वीं बार भाजपा के टिकट पर महाराजगंज से सांसद हैं,जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।

अब सबसे चिंतित करने वाली बात यह है कि अपनी मेहनत व बुद्धि के दम पर सिर्फ अपने परिवार का ही नहीं,बल्कि देश का पेट भरने वाली कौम क्या सिर्फ धर्म और हिंदुत्व के नाम पर अपनी ही कौम का,पिछड़ों का शोषण,अधिकार हनन करवाती रहेगी? आखिर कब तक?

आज भाजपा में हर प्रभावशाली जगहों पर उन्ही सामंती सवर्णो का कब्जा है, जिनके परिवार और बाप-दादा कभी कांग्रेसी हुआ करते थे और सत्ता की मलाई उड़ाते थे।

वैसे देखा जाय तो सामाजिक न्याय के जनक छत्रपति साहूजी महाराज के वंशज कुर्मी भाजपा के बंधुआ मजदूर बन सामाजिक न्याय के खलनायक बने हुए हैं।

कुर्मी जाति ब्राह्मण से भी कट्टरपंथी भाजपाई बन अपनी कौम व ओबीसी के पैर में कुल्हाड़ी मार रहा है।ऐसा लगता है यही कौम भाजपा की ठीकेदार है।

स्वतंत्रदेव सिंह इस समय भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष व मुकुट बिहारी वर्मा कैबिनेट मंत्री तथा अपना दल(एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा की सहयोगी हैं।इलाहाबाद में पिंटू पटेल व आशीष पटेल की सवर्णों ने दौड़ाकर गोली मारकर हत्या कर दिया।

बाँदा में एक कुर्मी को सामंती ठाकुरों ने चप्पलों पर थूक कर चटवाया।पर,उत्तर प्रदेश के 7 कुर्मी सांसद व 24 भाजपा विधायक जमीर बेचकर नपुंसक व गुलाम बन गूंगा-बहरा बने हुए हैं।

मण्डल का विरोध प्रवीण तोगड़िया,विनय कटियार, ओमप्रकाश सिंह,प्रेमलता कटियार, रामकुमार वर्मा,पंकज चौधरी, सन्तोष गंगवार आदि कूर्मियों ने कमण्डलधारियों के इशारे पर कहीं सवर्णों से अधिक किया और इनके बाद लोधी समाज के कल्याण सिंह, उमा भारती,साक्षी महाराज आदि ने हिंदुत्व का झंडा ऊँचा किया।

योगी राज में पिछड़ों व दलितों का शोषण-उत्पीड़न व अधिकार हनन हो रहा है,पर कुर्मी बेखबर हैं।

लोधी समाज का ज़मीर जाग रहा है।

चौ.लौटनराम निषाद

Published by Cow

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